हरदोई जिले के बेनीगंज नगर में प्रेम प्रसंग से जुड़ी एक दर्दनाक घटना ने पूरे कस्बे और आसपास के गांवों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गुरुवार को जहरीला पदार्थ खाकर जान देने वाले प्रेमी युगल के शव जब शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचे, तो दोनों परिवारों में ऐसा मातम छा गया कि देखने वालों की आंखें भी भर आईं। जिन घरों में कभी हंसी-ठिठोली गूंजती थी, वहां अब सिर्फ सन्नाटा, आंसू और चीखें बची हैं।
18 साल की शिवानी और 23 साल के अनूप की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि समाज के दबाव, हालात और जल्दबाजी में लिए गए फैसले कैसे जिंदगियां बर्बाद कर देते हैं
शव घर पहुंचते ही टूट गया परिवार
शुक्रवार की दोपहर जैसे ही शिवानी का शव बेनीगंज स्थित उसके घर पहुंचा तो मां-बाप अपने आप को संभाल नहीं पाए। बेटी की अर्थी देखकर मां बेहोस होकर गिर पड़ीं। आसपास की महिलाओं ने किसी तरह उन्हें संभाला, पानी पिलाया, लेकिन मां की जुबान से बस एक ही बात निकल रही थी कि
“मेरी बेटी ऐसा नहीं कर सकती थी… काश कोई उसे रोक लेता।”
उधर, अनूप के घर का हाल भी कुछ अलग नहीं था। 23 साल के जवान बेटे की मौत ने पूरे परिवार की कमर तोड़ दी। पिता बार-बार जमीन पर बैठकर सिर पीट रहे थे। छोटे भाई-बहन सहमे हुए कोने में बैठे थे, मानो उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो रहा हो कि उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा।
कैसे शुरू हुआ सब कुछ
घटना 20 नवंबर, गुरुवार सुबह की बताई जा रही है। उस वक्त शिवानी घर पर अकेली थी। उसकी मां अमावस्या स्नान के लिए नैमिषारण्य गई हुई थीं। इसी दौरान अनूप, जो कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला था, शिवानी से मिलने उसके घर पहुंचा।
बताया जा रहा है कि शिवानी की शादी तय हो जाने की बात को लेकर दोनों के बीच पहले से तनाव चल रहा था। मुलाकात के दौरान यही बात फिर से उठी और धीरे-धीरे कहासुनी बढ़ती चली गई। गुस्सा, डर और भावनाओं के सैलाब में दोनों ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों ने गुस्से और भावावेश में जहरीला पदार्थ खा लिया। यह फैसला एक पल में लिया गया था, लेकिन इसके असर ने दो परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
बिगड़ती हालत और अस्पताल की दौड़
जहर खाने के बाद शिवानी की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। इसी बीच अनूप वहां से चला गया और जाते समय उसने शिवानी का मोबाइल फोन शौचालय में फेंक दिया, ताकि किसी को तुरंत घटना की जानकारी न मिल सके।
जब शिवानी की तबीयत ज्यादा खराब हुई, तो परिजन उसे आनन-फानन में एक निजी अस्पताल में ले गए। वहां से हालत गंभीर देख उसे कोथावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया गया,
लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा पाए। घर में बेटी की मौत की खबर पहुंचते ही कोहराम मच गया। रिश्तेदार, पड़ोसी, जान-पहचान वाले सभी दौड़े चले आए, लेकिन किसी के पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।
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अनूप की तलाश और बाग में मिला शव
उधर, अनूप जब देर रात तक घर नहीं लौटा, तो उसके पिता को चिंता हुई। उन्होंने आसपास तलाश की और फिर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने खोजबीन शुरू की तो शुक्रवार सुबह अल्लीपुर मार्ग के पास एक आम के बाग में अनूप का शव मिला।
यह खबर जैसे ही गांव पहुंची, वहां भी मातम सा छा गया। अनूप के पिता मौत की खबर सुनकर अपनी सुध खो चुके थे। मां और भाई-बहन रो-रोकर बेहाल हो गए। एक ही दिन में बेटे की तलाश और फिर उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
गांव में पसरा सन्नाटा
शुक्रवार को जब दोनों के शव अंतिम संस्कार के लिए निकले, तो गांव की गलियां खामोश थीं। सैकड़ों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। हर चेहरे पर उदासी थी, हर जुबान पर बस यही सवाल कि
“अगर समय रहते कोई समझा देता, तो शायद ये दिन न देखना पड़ता।”
दोनों परिवारों की हालत ऐसी हो गई थी कि किसी घर में चूल्हा तक नहीं जला। मातम और खामोशी ने पूरे इलाके को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
पुलिस जांच और प्रशासन का पक्ष
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी सक्रिय हो गए। एएसपी पश्चिमी एम.पी. सिंह और सीओ अजीत चौहान ने बताया कि शुरुआती जांच में यह मामला प्रेम संबंध और युवती की तय शादी से उपजे मानसिक तनाव का प्रतीत होता है।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से जरूरी जानकारी और नमूने जुटाए हैं। दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
एक दर्दनाक सीख
शिवानी और अनूप की मौत सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं है। यह उस दबाव, डर और सामाजिक बंधनों की कहानी है, जिनमें कई युवा फंस जाते हैं। एक गलत फैसला, एक भावुक पल और दो परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
बेनीगंज की यह घटना समाज के लिए एक कड़वी चेतावनी है कि रिश्तों, तनाव और हालात को समझने के लिए संवाद और संवेदनशीलता जरूरी है, वरना ऐसे दर्दनाक अंजाम किसी भी घर का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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