हरदोई जिले में बुधवार आधी रात के बाद एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने न सिर्फ दो परिवारों को तोड़कर रख दिया, बल्कि पूरे इलाके को गम के माहौल में डाल दिया।
लखनऊ–दिल्ली रेलवे ट्रैक पर देहात कोतवाली क्षेत्र के खदरा रेलवे क्रॉसिंग के पास एक प्रेमी जोड़े ने ट्रेन के आगे खड़े होकर आत्महत्या कर ली। पुलिस की जाँच के बाद दोनों की पहचान हुई तो पता चला कि दोनों आपस में जीजा और साली थे। इस खुलासे के बाद मामला और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया।
यह घटना 14 जनवरी बुधवार रात करीब 2:15 बजे की बताई जा रही है। ट्रेन की रफ्तार इतनी तेज थी कि दोनों के शव कई टुकड़ों में बंटकर चारो तरफ फैल गए थे। रेलवे ट्रैक पर बिखरे शवों को देखकर मौके पर पहुंचे लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
कौन थे मृतक युवक और युवती?
मृतक युवक की पहचान रितेश कुमार सिंह (28) के रूप में हुई है। वह हरदोई के बघौली थाना क्षेत्र के गड़ेउरा गांव का रहने वाला था और हरियाणा के बहादुरगढ़ में रेक्सीन सोल बनाने की फैक्ट्री में काम करता था।
वहीं मृतका मुस्कान (23) मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के सुमेरपुर गांव की रहने वाली थी। मुस्कान, रितेश के छोटे भाई साकेत की साली थी, यानी रिश्ते में वह रितेश की साली लगती थी।
कैसे शुरू हुआ शक और तलाश?
परिजनों के मुताबिक, मंगलवार 13 जनवरी की सुबह मुस्कान घर से यह कहकर निकली थी कि वह मल्लावां बाजार दवा लेने जा रही है। लेकिन देर शाम तक जब वह अपने घर नहीं लौटी तो परिवार वालों को चिंता हुई। घर के लोगों ने आसपास तलाश की, रिश्तेदारों से पूछताछ की गई, लेकिन परिजनों को मुस्कान का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
इसके बाद मुस्कान के परिजनों को शक हुआ कि रितेश ही उसे कहीं लेकर गया है, क्योंकि पहले भी दोनों के बीच नजदीकियों की बातें परिजनों के सामने आ चुकी थीं।
बुआ के घर पहुंचा, बैग और मोबाइल छोड़ गया
बुधवार रात करीब 12 बजे, रितेश उत्तर प्रदेश के हरदोई शहर के मोहल्ला सुभाषनगर में रहने वाली अपनी बुआ बिट्टी सिंह के घर पहुंचा। उसने वहां अपना बैग और मोबाइल फोन रखा और यह कहकर निकल गया कि जरूरी काम से लखनऊ जा रहा है।
जाते-जाते उसने बुआ से इतना ही कहा कि “सुबह साकेत आए तो मेरा फोन और बैग उसे दे देना।”
उस वक्त किसी को अंदेशा नहीं था कि यह उसकी आखिरी मुलाकात होगी।
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ट्रेन के आगे खड़े होकर दे दी जान
बुधवार रात करीब 2:15 बजे दोनों खदरा रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचे। ग्रामीणों और चश्मदीदों की जानकारी के अनुसार, दोनों ने जानबूझकर ट्रेन के सामने खड़े होकर आत्महत्या की। दिल्ली की ओर जा रही ट्रेन की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद रेलवे ट्रैक पर शवों के टुकड़े बिखर गए
45 मिनट तक खड़ी रही बाघ एक्सप्रेस
हावड़ा से काठगोदाम जा रही बाघ एक्सप्रेस उसी ट्रैक पर पहुंची। लोको पायलट ने शवों को देखकर तुरंत ट्रेन रोक दी और स्टेशन मास्टर को सूचना दी।
घने कोहरे और शवों की हालत के कारण ट्रैक क्लियर करने में समय लग गया। इस वजह से ट्रेन करीब 45 मिनट तक वहीं खड़ी रही, जिससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पहचान कैसे हुई?
दोनों शवों की हालत इतनी खराब थी कि पहचान करना मुश्किल हो गया था। रितेश की पहचान उसके भाई साकेत ने बाएं कान के पीछे मौजूद तिल और कपड़ों से की
मुस्कान की पहचान उसकी मां नीतू सिंह ने कपड़ों और शरीर के निशानों से की मॉर्चरी में यह मंजर देख परिजन फूट-फूटकर रो पड़े।
CCTV से खुला एक और राज
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की जाँच में सुभाषनगर इलाके में लगे CCTV कैमरों की जांच में सामने आया कि मुस्कान बुधवार रात बुआ के घर के आसपास देखी गई थी। माना जा रहा है कि वह रितेश को लेने वहां आई थी और दोनों वहीं से साथ निकले थे।
पुलिस क्या कह रही है?
सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह मामला प्रेम प्रसंग का प्रतीत हो रहा है। दोनों आपस में करीबी रिश्तेदार थे और सामाजिक दबाव भी एक वजह हो सकता है। अन्य पहलुओं पर जांच जारी है।
परिवारों का दर्द
मुस्कान के फूफा सर्वेश सिंह का कहना है कि उसकी शादी के लिए लड़का देखा जा रहा था। अगर वह अपनी पसंद परिवार को बता देती, तो शायद कोई रास्ता निकल आता। लेकिन अब दोनों परिवार सिर्फ पछतावे और दर्द के साथ रह गए हैं।
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