भारत की चुनावी प्रणाली को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भरोसा और सम्मान देखने को मिला। सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (IDEA) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह बैठक नई दिल्ली में हुई, जिसमें भारत के लोकतांत्रिक अनुभव और चुनावी पारदर्शिता पर खुलकर चर्चा की गई।
आईडीईए के इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के महासचिव केविन कैसास जमोरा कर रहे थे। उनके साथ चीफ ऑफ स्टाफ जेसिका केहेस और सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज भी मौजूद रहे। बातचीत के दौरान भारत की चुनावी प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्थाओं और लोकतंत्र को मजबूत करने वाले कदमों पर विस्तार से विचार किया गया।
स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद अहम मुलाकात
यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब कुछ महीने पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्टॉकहोम इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्टोरल इंटीग्रिटी में की-नोट संबोधन दिया था। उस सम्मेलन में भी भारत की चुनावी प्रणाली को दुनिया के सामने एक मजबूत और भरोसेमंद मॉडल के रूप में रखा गया था।
सीईसी ने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधता भरे देश में निष्पक्ष चुनाव कराना आसान नहीं होता, लेकिन चुनाव आयोग ने हर चुनौती को लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ पार किया है।
50 देशों की मौजूदगी, भारत बना उदाहरण
आईडीईए द्वारा आयोजित इस वैश्विक मंच पर 50 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों (EMBs) से जुड़े 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस दौरान भारत के चुनावी ढांचे, निगरानी तंत्र और पारदर्शी प्रक्रियाओं की खूब सराहना हुई।
ज्ञानेश कुमार ने कहा,
“भारत में चुनाव केवल वोट डालने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह एक सामूहिक लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है, जिसमें राजनीतिक दल, उम्मीदवार, पर्यवेक्षक, मीडिया और सुरक्षा एजेंसियां सभी शामिल होती हैं।”
उन्होंने बताया कि भारत की चुनावी प्रक्रिया इस तरह डिजाइन की गई है कि हर स्तर पर जांच और संतुलन बना रहे, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न के बराबर हो।
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1951 से 2024 तक का सफर
सीईसी ने भारत की चुनावी यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि
1951-52 में पहले आम चुनाव के दौरान देश में 17.3 करोड़ मतदाता थे
जबकि 2024 तक यह संख्या बढ़कर 97.9 करोड़ मतदाताओं तक पहुंच गई
इतना ही नहीं, शुरुआती दौर में जहां देश में केवल 0.2 लाख मतदान केंद्र थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 10.5 लाख से अधिक पोलिंग स्टेशन हो चुकी है।
यह आंकड़े न सिर्फ भारत के लोकतंत्र की मजबूती को दिखाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि चुनाव आयोग ने समय के साथ खुद को कैसे विकसित किया है।
2024 चुनाव: एक विशाल अभ्यास
ज्ञानेश कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए बताया कि
इन चुनावों में 743 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया
जिनमें 6 राष्ट्रीय और 67 राज्य स्तरीय पार्टियां शामिल थीं
कुल 20,000 से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे
और 6.2 मिलियन EVMs का इस्तेमाल किया गया
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा करना भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों की ताकत को दर्शाता है।
लोकतंत्र के प्रति राष्ट्रीय संकल्प
मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग ने हमेशा संविधान की भावना को सर्वोपरि रखा है। चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न रहे हों, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर नहीं होने दिया गया।
उन्होंने कहा,
“पूरी ईमानदारी से चुनाव कराना सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भारत का राष्ट्रीय संकल्प है। आज भारत की चुनावी प्रक्रिया दुनिया के लिए प्रेरणा बन चुकी है।”
वैश्विक सहयोग की दिशा में कदम
आईडीईए प्रतिनिधिमंडल ने भी भारत के चुनाव आयोग की भूमिका की सराहना की और भविष्य में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। बैठक के दौरान तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और अनुभव साझा करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
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