दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुआ शर्टलेस प्रदर्शन अब एक बड़े कानूनी मामले में बदल गया हैं। 20 फरवरी को हुए इस विरोध के बाद अब दिल्ली पुलिस ने जांच को और भी गंभीर मानते हुए इस जाँच को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।
पटियाला हाउस कोर्ट ने भी आदेश देते हुए इस मामले की जांच को क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को ट्रांसफर कर दी। इस प्रदर्शन के सिलसिले में इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।
क्या है पूरा मामला?
20 फरवरी को जब भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट चल रहा था और देश-विदेश से प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में मौजूद थे, तभी कुछ यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता अचानक प्रदर्शनी हॉल में पहुंच गए। उन्होंने अपनी शर्ट उतारकर अपना विरोध जताया और टी-शर्ट पर लिखे नारों के जरिए भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भारत सरकार की नीतियों की आलोचना की।
इस कार्यक्रम के बीच अचानक हुए इस विरोध से वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हॉल से बाहर निकाल दिया था। हालांकि उस समय कोई बड़ी झड़प या हिंसा की खबर सामने नहीं आई, लेकिन इस घटना को लेकर विवाद बढ़ता गया।
जांच क्राइम ब्रांच को क्यों सौंपी गई?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन में शामिल लोग अलग-अलग राज्यों से आए थे। ऐसे में यह सिर्फ एक स्थानीय विरोध नहीं बल्कि यह मामला भारत के अलग अलग राज्यों से जुड़ा हो सकता है। इसी वजह से जांच को क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को सौंपा गया है, ताकि प्रदर्शनकारियों के पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच हो सके।
अब तक पुलिस इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। ताजा गिरफ्तारी जितेंद्र यादव की बताई जा रही है, जिसे मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पकड़ा गया हैं।
इससे पहले उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर और रायबरेली जैसे शहरों से भी लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
उदय भानु चिब से पूछताछ तेज
उदय भानु चिब को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने के बाद अब जांच एजेंसियों ने उनके दो मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं। अब इन डिवाइस की फोरेंसिक जांच की जाएगी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रदर्शन की योजना कैसे बनी, किन-किन लोगों से संपर्क हुआ और इस प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल था।
अब जांच एजेंसियां मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए यह समझना चाहती हैं कि क्या यह विरोध अचानक में हुआ था या इस विरोध को एक प्लानिंग के तहत किया गया हैं।
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पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह घटना ऐसे मंच पर हुई जहां पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि मौजूद थे। उनका दावा है कि इस तरह के प्रदर्शन से देश की छवि पर असर पड़ता हैं।
पुलिस का यह भी कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था होने के बाद भी विरोध करने वाले एआई इम्पैक्ट समिट हॉल के बीच पहुंचना भी गंभीर मामला है और इसकी पूरी जांच होना भी जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह देखा जा रहा है कि कहीं सुरक्षा में चूक तो नहीं हुई और क्या प्रदर्शनकारियों ने किसी नियम का उल्लंघन तो नहीं किया हैं।
बचाव पक्ष की दलील
उधर उदय भानु चिब के वकील रूपेश सिंह भदौरिया ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले को जरूरत से ज्यादा बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा हैं कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला हैं जिससे यह साबित हो कि किसी सरकारी अधिकारी पर हमला हुआ हो या कोई आपराधिक हरकत की गई हो या नफरत फैलाने वाला किसी तरह का भाषण दिया गया हो।
वकील का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित लगती है। उनका कहना है कि युवाओं की आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है
ताकि भविष्य में कोई खुलकर विरोध न कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि जिन शहरों से गिरफ्तारियां की गईं हैं वहां की जानकारी पुलिस के पास पहले से मौजूद थी, फिर भी अचानक इस तरह की कार्रवाई करना सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक रंग लेता मामला
एआई समिट जैसे बड़े कार्यक्रम के दौरान हुए इस विरोध ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। एक तरफ पुलिस इसे सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, वहीं दूसरी ओर यूथ कांग्रेस इसे शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार बता रही है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का विरोध ठीक नहीं।
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अब आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर क्राइम ब्रांच की जांच पर है। इंटर स्टेट सेल अलग-अलग राज्यों से जुड़े कनेक्शन और संभावित साजिश के पहलुओं की जाँच कर रही है। मोबाइल फोन की जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद कई ओर खुलासे हो सकते हैं।
अगर पुलिस को ठोस सबूत मिलते हैं तो आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं अगर बचाव पक्ष की दलीलें मजबूत साबित होती हैं तो मामला एक अलग दिशा भी ले सकता है।
फिलहाल इतना साफ है कि भारत मंडपम में हुआ यह शर्टलेस प्रदर्शन सिर्फ कुछ मिनटों का मामला नहीं रहा। अब यह एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। राजधानी में हुई इस घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विरोध करने की हद क्या होनी चाहिए और विरोध करने में कानून की सीमा कहां से शुरू होती है।












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