मेरठ – निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई फांसी नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी की असल सच्चाई है। पवन जल्लाद ने योगी सरकार से अपने मासिक मानदेय को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की अपील की है। उनका कहना है कि मौजूदा महंगाई में इतनी कम रकम में परिवार चलाना लगभग नामुमकिन हो गया है।
पवन जल्लाद वही शख्स हैं, जिन्होंने 20 मार्च 2020 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया केस के चारों दोषियों – मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को फांसी दी थी। उस दिन पूरा देश टीवी स्क्रीन के सामने खड़ा था और न्याय की आखिरी प्रक्रिया को देख रहा था। लेकिन आज वही शख्स अपने रोज़मर्रा के खर्चों से जूझ रहा है।
जेल अधीक्षक को लिखा पत्र
पवन जल्लाद ने अपनी मांग को लेकर मेरठ जिला कारागार के जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा को एक पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है कि उनका मौजूदा मानदेय परिवार की ज़रूरतें पूरी करने के लिए काफी नहीं है। और अपने मानदेय को बढ़ाने के लिए अपील की हैं
जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि
“पवन जल्लाद का आवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। अब इस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा।”
फिलहाल पवन को सरकार के जवाब का इंतज़ार है।
फांसी नहीं, फिर भी रोज़ जेल हाजिरी
पवन बताते हैं कि पिछले पांच सालों में किसी भी दोषी को फांसी नहीं दी गई है, लेकिन इसके बावजूद वे आज भी मेरठ जेल में नियमित रूप से हाजिरी लगाते हैं। उनका कहना है कि यह उनका पेशा है, और वे अपनी जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटे।
लेकिन सवाल यह है कि जब काम ही नहीं है, तो इतनी कम तनख्वाह में घर कैसे चले?
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आर्थिक तंगी की असली तस्वीर
पवन जल्लाद ने बातचीत में बेहद भावुक होते हुए कहा –
“मैं रोज़ जेल जाता हूँ। बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, राशन, बिजली-पानी सब कुछ 10 हजार में कैसे होगा? मैं कोई ऐश नहीं चाहता, बस सम्मान के साथ ज़िंदगी जीना चाहता हूँ।”
उन्होंने साफ कहा कि उनका पेशा समाज के लिए भले ही कठोर लगे, लेकिन वह भी एक इंसान हैं, उनकी अपनी ज़रूरतें और परिवार है। इतने कम खर्च में घर चलना मुश्किल हो गया है
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील
पवन जल्लाद ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सरकार ने हमेशा कानून और न्याय की बात की है, ऐसे में उनसे उम्मीद है कि उनकी हालत पर भी ध्यान दिया जाएगा। सरकार उनकी हालत को देखकर उच्च कदम उठाएगी
“फांसी समाज को बड़ा संदेश देती है”
फांसी की प्रक्रिया को लेकर पवन जल्लाद ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि
“फांसी के करीब 15 मिनट बाद शरीर ठंडा पड़ने लगता है। आधे घंटे के भीतर डॉक्टर मौत की पुष्टि कर देते हैं। यह सज़ा समाज के लिए सबसे बड़ा सबक होती है।”
उनका मानना है कि ऐसे अपराधों में कड़ी सज़ा जरूरी है, ताकि समाज में डर बना रहे और कोई दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करे।
एक कड़वा सवाल
इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है –
जो व्यक्ति देश के सबसे संवेदनशील मामलों में कानून का अंतिम चेहरा बना, क्या उसकी ज़िंदगी इतनी असहाय होनी चाहिए?
पवन जल्लाद की मांग कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की अपील है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है।
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